
नारायणपुर शिव मंदिर का इतिहास –
बलौदा बाज़ार जिले से 60 कि.मी दूर नारायणपुर गाँव में महानदी के किनारे बना ये शिव मंदिर लगभग 1200 सौ साल पुराना है मंदिर का निर्माण 9 वीं शताब्दी का है मंदिर एक बड़े पत्थर के मंडप पर बना है!
मंडप बलुवा काले पत्थरों का है जो छत्तीसगढ़ में नदी के आस पास मिलता है नारायणपुर एक छोटा सा गाँव है वर्त्तमान समय में नारायणपुर कसडोल तहसील का एक ग्राम पंचायत है ! मंदिर का निर्माण करने वाले दक्षिण कौसल में प्रथम शासन करने वाले कलचुरी राजवंश के राजा थे जिस भी राजा ने ये मंदिर का निर्माण कराया है उसकी मूर्ति मंदिर के बगल में बना मुर्तिशाला में है इस मंदिर के को बनाने वाले शिल्पी का नाम नारायण जिसे नाम पर इस गाँव का नाम का नाम रखा गया है !
मंदिर का अधुरा निर्माण और नारायण शिल्पी का इतिहास
नारायणपुर का ये मंदिर पूरा निर्मित नहीं है यहाँ पर दो मंदिर निर्मित है और दुनो मंदिर पूरी तरीके से निर्मित नहीं है इसके पीछे एक किवदन्ती है की आखिर मंदिर का निर्माण पूरा क्यों नहीं हुआ !

जब नारायण शिल्पी मंदिर का निर्माण कर रहे थे तब मंदिर को रात के समय में बनाते थे मशाल जलाकर अब सोचने वाली बात ये है की दिन के बजाये रात में मंदिर बनाने की जरुरत क्यों पड़ी होगी तो जब ये मंदिर बन रहा था तब इसमें जो मैथुन के चित्र उकेरे गए है !
उसे बनाने के लिए नारायण शिल्पी नग्न होकर मैथुन कृति को बनाते थे इस कारण मंदिर केवल रात के समय में बनता था और जहाँ मंदिर बन रहा था वहां किसी और का जाना माना था!
मंदिर अधुरा रहने का कारण ये था ! की जब नारायण शिल्पी मंदिर बनाते तो उनकी पत्नी उनके लिए भोजन लेकर जाती थी पर किसी कारण वश एक दिन उसकी पत्नी खाना नहीं ले जा पाई और नारायण शिल्पी की बहन खाना लेकर चली गयी और वहां पर नारायण शिल्पी नग्न होकर मंदिर के ऊपर का हिस्सा बना रहे थे !
जब उसने अपने बहेन को देखा तो वो शर्म से मंदिर के ऊपर से निचे कूद गया और वही उसकी मृत्यु हो गयी इस कारण से मंदिर का निर्माण पूरा न हो सका आज भी बहेन भाई को मंदिर में जाना माना है ! पर अब ये सब बाते कोई नहीं मानता !
मंदिर पर ऐसे मैथुन युक्त कलाओं को क्यों बनाया गया होगा
1 – छत्तीसगढ़ में ये पहला मंदिर नहीं है ऐसे बहोत से मंदिर है जिनमे काम कला को दर्शाया गया है! उस समय मंदिर ही शिक्षा का जगह हुआ करते थे पहले के समय में कोई अलग से स्कूल नहीं हुआ करते थे मंदिर ही स्कूल थे मंदिरों में ही पढाई लिखाई होती थी मंदिरों पर उकेरे गए ये मैथुन के चित्र इस बात का प्रमाण देते है की उस समय साइंस और सेक्स से सम्बंधित जानकारी स्कूल में पढाई जाती थी और बिना छुपा छुपाई के ये चित्र इस बात की संकेत देते है!
की सेक्स एक योग है यहाँ के चित्रों में जो स्थिति है वो योग से मिलते है इसका अर्थ सम्भोग एक योग साधना है जिसको सही प्रकार सही समय में किया जाये तो एक नए संसार की उत्पति होती है ! जो वर्तमान समय में काम को लोंगों के द्वारा बस एक इन्द्रियों की सुख का साधन बना दिया गया है और जहाँ इन्द्रियों का सुख होता है वहां केवल रोग और दुःख ही मिलते इसलिए आज लोगों में सेक्स से जुडी हुई बीमारियों का होना आम बात हो चूका है

2 – नारायणपुर से लगभग 45 की .मी दूर सिरपुर है 9वीं शताब्दी में बौद्ध संत बौद्ध धर्म के प्रचार प्रसार के लिए अये थे और 3 माह तक सिरपुर में निवासरत रहे और आस – पास के इलाको में जाके बौद्ध संघ का प्रचार प्रसार करने लगे उस समय बौद्ध धर्म अपने शिखर पर था
लोग बौद्ध धर्म से प्रभावित होकर बौद्ध धर्म को स्वीकारने लगे और अपने जीवन के चार स्तंभ में से दो स्तंभ को त्याग कर बौद्ध भिक्षु बनने लगे लोगों ने धर्म मोक्ष को धारण कर अर्थ और काम को त्याग दिया था इस वजह से
महिलाये अविवाहित और विवाहित महिलाओं को उनके पति के द्वारा त्यागा जाने लगा तब मंदिरों पर ये काम योग कृति को उकेरा गया होगा की संसार में भागने से कुछ प्राप्त नहीं होता जब लोगों के ये बात समझ आई तो वापस अपने मुख्य धारा में लौट आये !

जीवन को संतुलित ढंग से जिया जाये थो एक मनुष्य को अपने जीवन में मोक्ष की प्राप्ति जरुर होती है ! इतिहास में अनेको साधू संत हुए जिन्होंने अपने गृहस्थ में सत्य को पा लिया और संसार से मुक्त हो गए !

नारायणपुर (बलौदाबाजार) कैसे पहुँचें? (How to Reach)
- सड़क मार्ग (By Road): यह जगह रायपुर से लगभग 120 किमी और बलौदाबाजार जिला मुख्यालय से करीब 45-50 किमी की दूरी पर है। आप रायपुर या बलौदाबाजार से कसडोल के लिए बस या प्राइवेट टैक्सी ले सकते हैं।
- रेल मार्ग (By Train): सबसे नजदीकी बड़ा रेलवे स्टेशन रायपुर या भाटापारा है।
- हवाई मार्ग (By Air): सबसे पास का हवाई अड्डा स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट (रायपुर) है।
🗺️ आस-पास घूमने लायक अन्य जगहें (Nearby Attractions)
- तुरतुरिया (Turturiya): महर्षि वाल्मीकि का आश्रम माना जाता है।
- बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य (Barnawapara Wildlife Sanctuary): प्रकृति और वन्यजीव प्रेमियों के लिए बेहतरीन जगह।
- गिरौदपुरी धाम (Girodhpuri Dham): बाबा गुरु घासीदास जी की जन्मभूमि।
💡 यात्रियों के लिए छत्तीसगढ़हब (ChhattisgarhHub) टिप्स:
- सही समय: यहाँ घूमने के लिए अक्टूबर से मार्च का महीना सबसे अच्छा माना जाता है।
फोटोग्राफी: सुबह या शाम के वक्त यहाँ आएं, जब सूरज की किरणें पत्थरों की नक्काशी को और खूबसूरत बना देती हैं